इलाज न मिलने से प्लास्टिक जैसे अद्भुत बच्चे ने 36 घंटे बाद तोड़ा दम

नवजात शिशु

इलाज कराने में असमर्थ, एक प्लास्टिक जैसा नवजात शिशु 36 घंटे के बाद मर जाता है। बच्चे की मौत पर परिवार में कोहराम मचा हुआ था। बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इस बच्चे को लेकर जिले में काफी चर्चा हुई थी।

जहानाबाद के गांव गोनेरी के सूरजपाल की पत्नी मीना ने चार दिन पहले जिला महिला अस्पताल में प्लास्टिक जैसे एक अद्भुत बच्चे को जन्म दिया। उस अद्भुत बच्चे को देखने के लिए लोगों की भीड़ थी। जिसने भी सुना वह उसे अस्पताल में देखने आया। सोशल मीडिया पर भी बच्चे की तस्वीर का वायरल होने लगी। बच्चे का जन्म के समय वजन दो किलो 60 ग्राम था। डॉक्टरों ने जन्म से ही उसका इलाज करने से इनकार कर दिया था।

परिजन बच्चे को लेकर लखनऊ पहुंचे जहां डॉक्टरों को दिखाया लेकिन परिवार भी वहां निराश हो गया। डॉक्टरों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया। कहा जाता है कि लखनऊ में इनकार किए जाने के बाद, परिवार फिर से जिला अस्पताल में बच्चे को दिखने के लिए इकट्ठा हुआ, जहाँ उसे फिर से देखा गया।

परिजन अपने बच्चे को लेकर देर शाम घर पहुंचे। इधर गाँव में भी बच्चे की चर्चा आग की तरह पूरे गाँव में फैल गई। घर पर उसे देखने के लिए भीड़ जमा हो गई। बताया जाता है कि बीती रात घर में बच्चे की मौत हो गई। उसकी मौत से घर में कोहराम मच गया, मां का रो-रो कर बुरा हाल है।

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