Save Aarey: NGT की ओर से पहले ही मिल चुका था ग्रीन सिग्नल

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महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार के सामने एक नया मुद्दा खड़ा हो गया है। मुंबई में आरे कॉलोनी में मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे का कड़ा विरोध हो रहा है। 2500 से अधिक पेड़ों की कटाई राज्य सरकार के लिए एक समस्या बन गई है, हालांकि यह भी सच है कि इस मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट, एनजीटी द्वारा पहले ही हरी झंडी मिल गई थी।

मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट -3 के लिए इन पेड़ों को काटा जा रहा था, लेकिन कई प्रदर्शनकारियों, मशहूर हस्तियों ने इसका विरोध किया था। आरे के इन पेड़ों को मुंबई के फेफड़े कहा जाता है, काटने के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें उन्होंने जंगल घोषित करने की अपील की ताकि पेड़ों को न काटा जा सके। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें जंगल नहीं माना और तुरंत ही पेड़ों को काटने का काम शुरू हो गया।

पर्यावरण संरक्षण संगठन वनशक्ति और आरे बचाओ समूह के बैनर तले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के समक्ष बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका के बाद मामले को उठाया गया था, जिसके बाद एनजीटी की पुणे बेंच ने दिसंबर 2016 में निर्माण नहीं करवाने का आदेश दिया था।

इस समय महाराष्ट्र में चुनाव हैं और इस बीच इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में भी जगह बना ली है। भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद शिवसेना ने आरे में पेड़ काटने का विरोध किया है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। आदित्य ठाकरे सोशल मीडिया पर लगातार मोर्चा खोल रहे हैं, ऐसे दिनों में यह मुद्दा चुनावी दंगल का रूप ले सकता है।

दरअसल, मुंबई के आरे में एक मेट्रो कार शेड बनाया जाना है। इसके लिए आरे के जंगलों में लगभग 2,700 पेड़ काटे जाने हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है। मेट्रो के लिए पेड़ों की कटाई का लोग मुंबई की सड़कों पर जोर शोर से विरोध कर रहे हैं। इस मामले में, ‘सेव आरे’ प्रोटेस्ट चल रहा है, सोशल मीडिया पर अभियान चलाए जा रहे हैं।

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