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कर्नाटक संकट: क्या होगा विश्वास मत साबित करने पर?

Karnataka Crisis: लंबे समय से जारी कर्नाटक में संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए बागी विधायकों के इस्तीफों पर निर्णय का अधिकार स्पीकर पर छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर कहा है कि स्पीकर को एक समय सीमा के भीतर फैसला लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को कल फ्लोर टेस्ट में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के बागी विधायकों का पक्ष रखने वाले मुकुल रोहतगी ने कहा कि कल होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले सुप्रीम कोर्ट ने दो महत्वपूर्ण बातें की हैं। 15 विधायकों को विश्वास मत में हिस्सा लेने को मजबूर नहीं किया जा सकता है। सभी बागी विधायकों को कल सदन में जाने या नहीं जाने की स्वतंत्रता भी दी गई है।

कोर्ट के फैसले के बाद यदि गुरुवार को कुमारस्वामी सरकार फ्लोर टेस्ट कराती है तो फिर जानिए किसे फायदा हो सकता है। जानिए क्या कहता है कर्नाटक विधानसभा का अंक गणित:

विश्वासमत साबित करने पर क्या होगा?

1- अगर 16 बागी विधायक सरकार के खिलाफ वोटिंग करें। इस स्थिति में सरकार के पक्ष में 100 वोट पड़ेंगे। ये संख्या बहुमत के लिए जरूरी 112 के आंकड़े से कम है। ऐसे में कुमारस्वामी सरकार सदन में विश्वासमत खो देगी।

2- बागी विधायक सदन से अनुपस्थित रहें। इस स्थिति में विश्वासमत के समय सदन में सदस्य संख्या 208 रह जाएगी। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 105 का हो जाएगा। लेकिन, बागियों की अनुपस्थिति में सरकार के पक्ष में केवल 100 वोट पड़ेंगे और सरकार गिर जाएगी।

3- अगर विधानसभा अध्यक्ष बागियों को अयोग्य ठहरा देते हैं तो भी सदन में विश्वासमत के वक्त सरकार को बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए। यह उसके पास नहीं होगा। ऐसे में भी सरकार गिर जाएगी।

(Source: Live Hindustan)

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